पल में सब सौंदर्य समा है..


 

पल में सब सौंदर्य समा है

पल में रहती है हाला,

‘माँग रहे क्यूँ जीवन सारा?’

कहती है ये सुरबाला,

जीवन-तल पर गौहर जैसे

बिखरे कितने ही क्षण हैं,

अपने जीवन से तुमको ये

क्षण देती है मधुशालाI

 

 

a moment embraces lasting beauty,
in an
instant dwells sublime poetry…

“why long for a lifetime?”,
this
music nymph wonders…

these moments like precious sapphires
bristle
in one’s true beingness

arrive, experience such jewels
from
Tavern’s benign vigour.

 

-Siddharth Singh
Ghaziabad

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चिंतन के बाज़ार


 

ये कोई उपदेश नहीं हैं

ना आदर्शों का जाला,

चिंतन के बाज़ार गर्म यूँ

भटका जित भोला-भाला ,

पाप-पुण्य का ज्ञान तुम्हें इस

जग में सबसे ज़्यादा है

मुझपे मदिरा की दो बूँदें

तुम पर पूरी मधुशालाI

 

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मैं ढूँढ रहा वो मधुशाला


ऐसी मदिरा जिसमें खुद को

ढूँढ सके पीनेवाला,

साकी जो मद्धम-सी कर दे

तीव्र वेदना की ज्वाला ,

मतवाले औ’ मदिरालय में

अंतर मुश्किल हो जाये,

ऐसी साख जहाँ हो सखि मैं,

ढूँढ रहा वो मधुशालाI

 

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असमंजस में..


आसक्ति में और ना कुछ बस

छिपी अश्रुओं की हाला,

पर एकाकी जीवन तो है

मधु से रीता इक प्याला,

सन्नाटे औ’ कोलाहल में

इसे चुनूँ या उसे चुनूँ,

भीतर मूक तमा है भीषण

बाहर बहकी मधुशालाI

मूक तमा – चुप अँधेरा

 

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